Emergency में 102 या 108? किसे कॉल करें? जानिये सही अंतर और अपनी जान बचाएं (Complete Guide)

भगवान न करे कि कभी आपको या आपके परिवार में किसी को Medical Emergency का सामना करना पड़े। लेकिन मुसीबत कभी बता कर नहीं आती।

सोचिए, घर में किसी को अचानक हार्ट अटैक आ गया है या सड़क पर कोई एक्सीडेंट हो गया है। घबराहट में हाथ कांप रहे हैं। आप फ़ोन निकालते हैं, लेकिन दिमाग सुन्न हो जाता है—“यार, एम्बुलेंस का नंबर क्या था? 100, 101, 102 या 108?”

यकीन मानिए, उस नाजुक वक्त में 1-1 सेकंड की कीमत होती है। गलत नंबर मिलाने का मतलब है—कीमती समय बर्बाद होना।

भारत में एम्बुलेंस सेवाओं को लेकर लोग अक्सर 102 और 108 के बीच कन्फ्यूज हो जाते हैं। आज का यह आर्टिकल आपकी यह कन्फ्यूजन हमेशा के लिए दूर कर देगा। इसे अंत तक पढ़ें, यह जानकारी किसी की जान बचा सकती है।


108 एम्बुलेंस सेवा: “The Life Saver” (जीवन रक्षक) 🚑

सबसे पहले बात करते हैं 108 की। यह भारत की सबसे प्रमुख आपातकालीन सेवा (Emergency Service) है।

इसे कब कॉल करें? (When to Call)

जब मामला Critical (गंभीर) हो। यानी जान जाने का खतरा हो।

  1. सड़क दुर्घटना (Road Accident): अगर एक्सीडेंट हुआ है और चोट लगी है।
  2. हार्ट अटैक या स्ट्रोक: सीने में तेज दर्द या सांस लेने में दिक्कत।
  3. जलना या जहर: अगर कोई बुरी तरह जल गया हो या जहर खा लिया हो।
  4. पुलिस और फायर: 108 एक ‘Integrated’ सेवा है। अगर ज़रुरत पड़ी तो ये पुलिस और फायर ब्रिगेड को भी इन्फॉर्म कर देते हैं।

खासियत:

108 एम्बुलेंस में आमतौर पर Advanced Life Support (ALS) सिस्टम होता है। इसमें ऑक्सीजन, वेंटिलेटर और ट्रेंड मेडिकल स्टाफ होता है जो अस्पताल पहुँचने तक मरीज की जान बचाने की कोशिश करता है।

👉 याद रखें: इमरजेंसी मतलब 108


102 एम्बुलेंस सेवा: “Maternity & Child Care” (जच्चा-बच्चा सुरक्षा) 🤰

अब बात करते हैं 102 की। यह नंबर मुख्य रूप से गर्भवती महिलाओं (Pregnant Women) और नवजात शिशुओं (Newborns) के लिए है।

यह सेवा Janani Shishu Suraksha Karyakram (JSSK) के तहत आती है।

इसे कब कॉल करें? (When to Call)

  1. डिलीवरी के लिए: गर्भवती महिला को घर से सरकारी अस्पताल ले जाने के लिए।
  2. वापसी के लिए: डिलीवरी के बाद माँ और बच्चे को अस्पताल से घर छोड़ने के लिए (Drop-back facility)।
  3. बीमार शिशु: अगर 1 साल तक का बच्चा बीमार है, तो उसे अस्पताल ले जाने के लिए।

खासियत:

यह एम्बुलेंस ‘Basic Life Support’ वाली होती है। यह इमरजेंसी के लिए नहीं, बल्कि Transportation (लाने-ले जाने) के लिए ज्यादा इस्तेमाल होती है।

👉 याद रखें: डिलीवरी या बच्चा मतलब 102


आसान तुलना: 102 vs 108 (Comparison Table)

अगर आप पढ़ने में आलस कर रहे हैं, तो बस यह टेबल देख लें:

फीचर108 Ambulance102 Ambulance
प्रकृति (Nature)आपातकालीन (Emergency)गैर-आपातकालीन (Non-Emergency)
मरीजएक्सीडेंट, हार्ट अटैक, ट्रॉमागर्भवती महिलाएं और शिशु
सुविधाएंऑक्सीजन, वेंटिलेटर, पैरामेडिक्सबेसिक फर्स्ट एड (First Aid)
शुल्क (Cost)सरकारी अस्पतालों के लिए फ्रीपूरी तरह से फ्री
उद्देश्यजान बचाना (Save Life)सुरक्षित सफर (Safe Travel)

एम्बुलेंस बुलाते समय ये 3 गलतियां न करें ❌

हड़बड़ी में लोग अक्सर गलतियां करते हैं। जब भी आप कॉल करें, इन बातों का ध्यान रखें:

  1. Location साफ़ बताएं:सिर्फ यह मत बोलिए—”जल्दी आ जाओ, एक्सीडेंट हो गया है!” ऑपरेटर को आपकी लोकेशन नहीं पता।उन्हें लैंडमार्क बताएं (जैसे: “हनुमान मंदिर के पास, मेन मार्किट के सामने, लुधियाना”).
  2. मरीज की हालत बताएं:साफ़ बताएं कि मरीज सांस ले रहा है या नहीं, खून बह रहा है या बेहोश है। इससे वे सही एम्बुलेंस (ALS या BLS) भेज पाएंगे।
  3. फोन न काटें:जब तक ऑपरेटर न कहे, फ़ोन न काटें। हो सकता है वे आपको कुछ फर्स्ट-एड (First Aid) की सलाह दें जो एम्बुलेंस आने तक मरीज को जिंदा रखे।

Frequently Asked Questions (FAQs)

Q1. क्या 108 एम्बुलेंस के पैसे लगते हैं?

ज़्यादातर राज्यों में सरकारी 108 सेवा बिलकुल फ्री है। यह आपको नजदीकी सरकारी अस्पताल तक पहुंचाती है। अगर आप प्राइवेट एम्बुलेंस बुलाते हैं, तो उनका चार्ज लगता है।

Q2. अगर नेटवर्क न हो तो क्या करें?

108 और 102 टोल-फ्री नंबर हैं। अगर आपके फ़ोन में बैलेंस नहीं है, या सिम ब्लॉक है, तब भी आप Emergency Call के ज़रिये इन्हें मिला सकते हैं।

Q3. क्या मैं डिलीवरी के लिए 108 को कॉल कर सकता हूँ?

हाँ, अगर 102 उपलब्ध नहीं है या मामला बहुत गंभीर (Emergency) है, तो आप 108 को भी कॉल कर सकते हैं। वे मना नहीं करेंगे।

Q4. एम्बुलेंस आने में कितना समय लगता है?

यह ट्रैफिक और लोकेशन पर निर्भर करता है। शहरी इलाकों में औसतन 15-20 मिनट और ग्रामीण इलाकों में 30-40 मिनट का समय लग सकता है।


निष्कर्ष (Conclusion)

दोस्तों, मोबाइल में हजारों बेकार नंबर सेव करने से बेहतर है कि ये दो नंबर हमेशा याद रखें।

  • 108 = जान बचाने के लिए (Accidents/Emergency)
  • 102 = माँ और बच्चे के लिए (Mother & Child)

जागरूक बनें और दूसरों को भी बताएं। आपकी एक छोटी सी जानकारी किसी के घर का चिराग बुझने से बचा सकती है।


Disclaimer: यह जानकारी सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी मेडिकल इमरजेंसी में तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें।


क्या आपने कभी 108 एम्बुलेंस की सेवा ली है? अपना अनुभव कमेंट में जरूर शेयर करें ताकि दूसरों को मदद मिले!

⚠️ अस्वीकरण (Disclaimer)

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