Generic Medicine vs Branded Medicine: क्या सस्ती दवाइयां सच में असर करती हैं? (2025 Guide)

भारत में जब कोई बीमार पड़ता है, तो बीमारी की तकलीफ से ज्यादा चिंता इलाज के खर्च की होती है। एक मिडिल क्लास परिवार अपनी कमाई का एक बड़ा हिस्सा सिर्फ दवाइयों पर खर्च कर देता है।

आपने अक्सर सुना होगा कि Generic Medicines (जेनेरिक दवाइयां) सस्ती होती हैं। लेकिन हमारे मन में हमेशा एक डर रहता है—“क्या 10 रुपये वाली दवा वही काम करेगी जो 100 रुपये वाली करती है?” कहीं सस्ती दवा के चक्कर में सेहत से खिलवाड़ तो नहीं हो रहा?

आज के इस आर्टिकल में हम Generic vs Branded का पूरा सच जानेंगे। यह जानकारी न सिर्फ आपका भ्रम तोड़ेगी, बल्कि आपके लाखों रुपये भी बचा सकती है।


Generic Medicine क्या होती है? (What is Generic Medicine?)

आसान भाषा में समझें तो दवा का “असली नाम” ही जेनेरिक है।

जब कोई कंपनी नई दवा खोजती है, तो उसे एक Salt Name (केमिकल नाम) दिया जाता है।

  • उदाहरण: बुखार की दवा का केमिकल नाम Paracetamol है।
  • Branded: जब कोई बड़ी कंपनी इसे अपने नाम से बेचती है (जैसे Crocin, Calpol, Dolo), तो वह ब्रांडेड दवा कहलाती है।
  • Generic: जब उसी दवा को उसके असली नाम (Paracetamol) से बेचा जाता है, तो वह जेनेरिक दवा कहलाती है।

👉 Bottom Line: दोनों के अंदर का मसाला (Active Ingredient) बिल्कुल Same होता है।


कीमत में इतना अंतर क्यों होता है? (Why are they cheap?)

यह सबसे बड़ा सवाल है। अगर दोनों एक ही चीज़ हैं, तो एक पत्ता 100 रुपये का और दूसरा 15 रुपये का क्यों?

इसके पीछे 3 मुख्य कारण हैं:

  1. Research & Development (R&D): जब कोई कंपनी नई दवा बनाती है, तो उसे खोजने में करोड़ों रुपये लगते हैं। इसलिए उसे 20 साल तक उस दवा को महंगा बेचने का हक (Patent) मिलता है ताकि वह अपना खर्चा निकाल सके।
  2. Marketing Costs: ब्रांडेड कंपनियां TV पर विज्ञापन देने, मेडिकल रिप्रजेंटेटिव्स (MR) रखने और डॉक्टर्स को सैंपल देने में भारी खर्च करती हैं। यह सारा खर्चा दवा की कीमत में जुड़ जाता है।
  3. Generic का फायदा: जेनेरिक दवाइयां तब बनती हैं जब पेटेंट खत्म हो जाता है। इन्हें बनाने वाली कंपनियों को रिसर्च या विज्ञापन पर खर्च नहीं करना पड़ता। वे सीधे दवा बनाती हैं और बेचती हैं, इसलिए ये 80% से 90% तक सस्ती होती हैं।

Generic दवाइयों से जुड़े 5 बड़े झूठ (Myths vs Facts)

समाज में सस्ती दवाओं को लेकर कई अफवाहें हैं। चलिए उन्हें दूर करते हैं:

Myth (झूठ/भ्रम)Fact (सच)
सस्ती दवाइयां कम असर करती हैं।बिल्कुल नहीं। इनका असर (Effectiveness) ब्रांडेड दवा जैसा ही होता है।
ये दवाइयां सुरक्षित (Safe) नहीं हैं।जेनेरिक दवाओं को भी उन्हीं कड़े सरकारी टेस्ट (CDSCO/FDA) से गुजरना पड़ता है।
इन्हें गरीब देशों के लिए बनाया गया है।अमेरिका (USA) में 90% मरीज Generic दवाइयां ही इस्तेमाल करते हैं।
बीमारी ठीक होने में ज्यादा समय लगता है।दवा का घुलने का समय (Dissolution) दोनों में बराबर होता है।
डॉक्टर इसे नहीं लिखते क्योंकि यह खराब है।डॉक्टर इसे इसलिए कम लिखते हैं क्योंकि ब्रांडेड दवाओं की मार्केटिंग ज्यादा तगड़ी होती है।

जन औषधि केंद्र (Jan Aushadhi Kendra): सरकार की पहल

भारत सरकार ने आम जनता को सस्ता इलाज देने के लिए PMBJP (Pradhan Mantri Bhartiya Janaushadhi Pariyojana) शुरू की है।

आज देश भर में 10,000 से ज्यादा जन औषधि केंद्र खुल चुके हैं।

  • यहाँ शुगर (Diabetes) की दवा जो बाजार में 1000 रुपये की है, वो यहाँ 150-200 रुपये में मिल जाती है।
  • हार्ट, बीपी, और कैंसर जैसी महंगी दवाइयां भी यहाँ उपलब्ध हैं।
  • आप “Jan Aushadhi Sugam” ऐप डाउनलोड करके अपने पास का केंद्र ढूँढ सकते हैं।

दवा खरीदने से पहले क्या चेक करें? (Smart Buying Tips)

अगली बार जब आप मेडिकल स्टोर पर जाएं, तो ये स्टेप्स फॉलो करें:

  1. Salt Name देखें: दवा के पत्ते के पीछे देखें। अगर डॉक्टर ने ब्रांड लिखा है, तो केमिस्ट से पूछें, “भैया, इसी Salt की कोई अच्छी Generic दवा है क्या?”
  2. Expiry Date: सस्ती दवा लेते वक्त भी Expiry date चेक करना न भूलें।
  3. Doctor से बात करें: बेझिझक अपने डॉक्टर से पूछें, “Doctor Sahab, क्या आप मुझे जेनेरिक दवा लिख सकते हैं? मेरा बजट कम है।” अच्छे डॉक्टर आपकी मदद जरूर करेंगे।

Frequently Asked Questions (FAQs)

Q1. क्या बिना डॉक्टर की सलाह के Generic दवा ले सकते हैं?

नहीं। चाहे दवा ब्रांडेड हो या जेनेरिक, उसे डॉक्टर की सलाह पर ही लेना चाहिए। दवा का नाम (Salt) वही होना चाहिए जो डॉक्टर ने बताया है।

Q2. मुझे कैसे पता चलेगा कि दवा Generic है या Branded?

ब्रांडेड दवाओं के नाम फैंसी होते हैं (जैसे Crosin)। जेनेरिक दवाओं पर अक्सर सॉल्ट का नाम बड़े अक्षरों में लिखा होता है (जैसे Paracetamol 500mg)। जन औषधि केंद्र पर सिर्फ जेनेरिक दवाइयां ही मिलती हैं।

Q3. क्या गंभीर बीमारियों (जैसे Heart/Kidney) में जेनेरिक दवा लेना सेफ है?

जी हाँ, दुनिया भर के अस्पतालों में गंभीर बीमारियों के लिए जेनेरिक दवाओं का ही इस्तेमाल होता है। बस ध्यान रखें कि आप दवा किसी भरोसेमंद दुकान या जन औषधि केंद्र से ही खरीदें।


Conclusion (निष्कर्ष)

महंगा हमेशा बेहतर नहीं होता। Generic Medicines भारत के हेल्थकेयर सिस्टम में एक क्रांति (Revolution) हैं। यह अमीर और गरीब के बीच इलाज के फर्क को मिटा रही हैं।

अगर आप एक स्मार्ट नागरिक बनना चाहते हैं, तो अगली बार दवा खरीदने से पहले एक बार ‘जेनेरिक विकल्प’ के बारे में जरूर सोचें। इससे न केवल आपके पैसे बचेंगे, बल्कि देश की इस मुहिम को भी सपोर्ट मिलेगा।


Disclaimer: यह ब्लॉग केवल सामान्य जानकारी (General Information) के लिए है। हम कोई मेडिकल सलाह नहीं देते। दवा बदलने या शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर या रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट से परामर्श जरूर लें।

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